Connect with us

ज्यादा मक्खन खाना सेहत के लिए पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल और मोटापे का खतरा

स्वास्थ्य

ज्यादा मक्खन खाना सेहत के लिए पड़ सकता है भारी, बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल और मोटापे का खतरा

आजकल फूड ब्लॉगिंग और सोशल मीडिया पर खाने को ज्यादा स्वादिष्ट दिखाने के लिए उसमें भरपूर मक्खन डालने का चलन बढ़ रहा है। बटर से तैयार व्यंजन देखने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन इनका नियमित रूप से अधिक सेवन सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। मक्खन में मौजूद सैचुरेटेड फैट और अधिक कैलोरी के कारण वजन बढ़ने से लेकर हृदय संबंधी समस्याओं तक का जोखिम बढ़ सकता है।

मक्खन दूध से बनने वाला डेयरी उत्पाद है, जिसमें वसा की मात्रा काफी अधिक होती है। सीमित मात्रा में इसका सेवन संतुलित आहार का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसे रोजाना ज्यादा मात्रा में खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, मक्खन खाते समय इसकी मात्रा और पूरे दिन के आहार में शामिल वसा पर ध्यान देना जरूरी है।

बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा

मक्खन में सैचुरेटेड फैट अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसका जरूरत से ज्यादा सेवन रक्त में एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ा सकता है। जब एलडीएल कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, तो धमनियों में प्लाक जमा होने का खतरा बढ़ सकता है। इस प्रक्रिया को एथेरोस्क्लेरोसिस कहा जाता है।

यह भी पढ़ें -  डायबिटीज से बचना है तो आज ही बदलें ये 5 आदतें, वरना बढ़ सकता है टाइप-2 डायबिटीज का खतरा

धमनियों में प्लाक जमा होने से रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर हृदय रोग और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए जिन लोगों को पहले से कोलेस्ट्रॉल या हृदय संबंधी परेशानी है, उन्हें अपने खानपान में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

ज्यादा मक्खन से बढ़ सकता है वजन

मक्खन में कैलोरी की मात्रा भी काफी अधिक होती है। एक बड़े चम्मच मक्खन में लगभग 100 कैलोरी हो सकती हैं। अगर रोजाना भोजन में जरूरत से ज्यादा मक्खन शामिल किया जाए, तो शरीर को मिलने वाली कुल कैलोरी बढ़ जाती है। लंबे समय तक अतिरिक्त कैलोरी लेने से वजन बढ़ने की आशंका रहती है।

वजन बढ़ने और मोटापे के कारण डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी समस्याओं का जोखिम भी बढ़ सकता है। इसलिए पराठे, ब्रेड, सब्जियों और अन्य व्यंजनों में मक्खन का इस्तेमाल करते समय मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।

यह भी पढ़ें -  सुबह मुनक्का खाना कितना फायदेमंद? जानें इसके पोषक तत्व और सेवन का सही तरीका

मस्तिष्क की सेहत पर भी पड़ सकता है असर

सैचुरेटेड फैट के अधिक सेवन और मस्तिष्क के स्वास्थ्य के बीच संबंधों को लेकर भी कई अध्ययन किए गए हैं। कुछ शोधों में अधिक संतृप्त वसा के सेवन को अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है।

हालांकि, ऐसे अध्ययनों के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि मक्खन खाने से सीधे अल्जाइमर या डिमेंशिया होता है। इन बीमारियों के पीछे उम्र, आनुवंशिक कारणों और जीवनशैली समेत कई कारक हो सकते हैं। फिर भी, संतृप्त वसा का सेवन सीमित रखना समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।

रोजाना कितनी सैचुरेटेड फैट लेनी चाहिए?

स्वास्थ्य संबंधी सामान्य दिशानिर्देशों के अनुसार, रोजाना मिलने वाली कुल कैलोरी में सैचुरेटेड फैट की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से कम रखनी चाहिए। उदाहरण के लिए, 2,000 कैलोरी प्रतिदिन लेने वाले व्यक्ति के लिए यह मात्रा लगभग 22 ग्राम प्रतिदिन होती है।

यह भी पढ़ें -  सुबह मुनक्का खाना कितना फायदेमंद? जानें इसके पोषक तत्व और सेवन का सही तरीका

यह सीमा केवल मक्खन से मिलने वाली वसा के लिए नहीं, बल्कि पूरे दिन खाए जाने वाले सभी खाद्य पदार्थों से मिलने वाली संतृप्त वसा के लिए है। घी, पनीर, क्रीम और कुछ अन्य खाद्य पदार्थों में भी इसकी मात्रा अधिक हो सकती है।

मक्खन की जगह क्या इस्तेमाल करें?

खाने में वसा की मात्रा संतुलित रखने के लिए मक्खन का इस्तेमाल सीमित किया जा सकता है। इसकी जगह जरूरत और व्यंजन के अनुसार सरसों, मूंगफली या जैतून जैसे असंतृप्त वसा वाले तेलों का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, इनका सेवन भी उचित मात्रा में करना जरूरी है, क्योंकि सभी प्रकार की वसा में कैलोरी अधिक होती है।

कुल मिलाकर, मक्खन को पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन करने से बचना चाहिए। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और सही मात्रा में वसा का सेवन लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है।

Ad Ad
Continue Reading

More in स्वास्थ्य

Ad Ad

Latest News

Author

Author: Shakshi Negi
Website: www.gairsainlive.com
Email: gairsainlive@gmail.com
Phone: +91 9720310305