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मामूली सर्दी-जुकाम समझकर न करें नजरअंदाज, ये लक्षण हो सकते हैं साइनस संक्रमण के संकेत

स्वास्थ्य

मामूली सर्दी-जुकाम समझकर न करें नजरअंदाज, ये लक्षण हो सकते हैं साइनस संक्रमण के संकेत

बदलते मौसम में नाक बंद होना, छींक आना और सिरदर्द जैसी परेशानियां आम हैं। अक्सर लोग इन्हें सामान्य सर्दी-जुकाम मानकर घरेलू उपायों से ठीक होने का इंतजार करते हैं। हालांकि, अगर नाक बंद रहने के साथ चेहरे पर दबाव, गाढ़ा बलगम या सिर में लगातार दर्द बना हुआ है और समस्या कई दिनों तक दूर नहीं हो रही, तो मामला साइनस संक्रमण का भी हो सकता है। ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना परेशानी को बढ़ा सकता है।

साइनस हमारी खोपड़ी के अंदर आंखों, नाक, माथे और गालों के आसपास मौजूद हवा से भरी छोटी-छोटी गुहाएं होती हैं। इनका संबंध सांस लेने और आवाज की गूंज से भी होता है। सामान्य स्थिति में इनकी अंदरूनी सतह बलगम बनाती है, जो छोटे मार्गों के जरिए नाक तक पहुंचकर बाहर निकल जाता है। लेकिन सूजन आने पर इन रास्तों में रुकावट पैदा हो सकती है और बलगम जमा होने लगता है।

कैसे शुरू होती है साइनस की समस्या?

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साइनस संक्रमण की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल सर्दी-जुकाम के बाद होती है। संक्रमण या एलर्जी के कारण नाक और साइनस की अंदरूनी परत में सूजन आ जाती है। इससे बलगम बाहर निकलने में परेशानी होती है और साइनस के भीतर दबाव बढ़ने लगता है।

अधिकतर मामलों में संक्रमण वायरस से जुड़ा होता है, जबकि कुछ परिस्थितियों में बैक्टीरिया भी इसकी वजह बन सकते हैं। इसके अलावा नाक की अंदरूनी संरचना में बदलाव, जैसे नाक की हड्डी का टेढ़ापन, भी बार-बार होने वाली साइनस की समस्या में भूमिका निभा सकता है।

किन संकेतों से पहचानें साइनस संक्रमण?

साइनस की परेशानी होने पर नाक और चेहरे के आसपास इसके लक्षण ज्यादा स्पष्ट नजर आ सकते हैं। नाक लंबे समय तक बंद रहना, गाढ़ा या ज्यादा मात्रा में नाक का स्राव, सिर में दर्द और चेहरे पर दबाव महसूस होना इसके प्रमुख संकेत हैं।

कुछ लोगों में गालों, माथे या आंखों के आसपास दर्द या भारीपन महसूस हो सकता है। इसके साथ सूंघने की क्षमता कमजोर पड़ना, गले में बलगम पहुंचना, खांसी और थकान जैसी शिकायतें भी हो सकती हैं। कभी-कभी स्वाद महसूस करने की क्षमता में भी बदलाव आ सकता है।

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अगर लक्षण लगातार बने रहें, बार-बार वापस आएं या समय के साथ ज्यादा गंभीर होते जाएं, तो डॉक्टर से जांच और उचित सलाह लेना बेहतर रहता है।

किन लोगों में ज्यादा हो सकता है खतरा?

जिन लोगों को बार-बार सर्दी-जुकाम, एलर्जी या नाक बंद होने की शिकायत रहती है, उनमें साइनस से जुड़ी समस्या होने की संभावना बढ़ सकती है। नाक के रास्ते में लगातार रुकावट या उसकी संरचना से जुड़ी परेशानी भी जोखिम बढ़ा सकती है।

इसके अलावा धूल, धुआं और वायु प्रदूषण के संपर्क में ज्यादा रहने से नाक की अंदरूनी परत में जलन और सूजन हो सकती है। फफूंद, धूल या अन्य एलर्जेन से संवेदनशील लोगों में भी साइनस की समस्या दोबारा होने की आशंका रहती है।

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बचाव के लिए किन बातों का रखें ध्यान?

साइनस की परेशानी से बचने के लिए शरीर को पर्याप्त हाइड्रेटेड रखना, व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखना और धूल-धुएं तथा प्रदूषित वातावरण से यथासंभव दूरी बनाना उपयोगी हो सकता है। जिन चीजों से एलर्जी होती है, उनसे बचना भी जरूरी है।

नाक बंद होने पर कुछ लोगों को भाप लेने से थोड़ी देर के लिए राहत महसूस हो सकती है, लेकिन बहुत गर्म भाप लेने से त्वचा या सांस की नली को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए घरेलू उपायों को इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। यदि लक्षण लंबे समय तक बने रहते हैं या बिगड़ रहे हैं, तो विशेषज्ञ की सलाह लेना सबसे उचित कदम है।

नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट्स और सामान्य स्वास्थ्य संबंधी जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लगातार बने रहने पर चिकित्सकीय सलाह जरूर लें।

(साभार)

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Author: Shakshi Negi
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