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एनीमिया में किशमिश कितनी फायदेमंद? जानिए कब डाइट से मिलेगा लाभ और कब जरूरी है इलाज

स्वास्थ्य

एनीमिया में किशमिश कितनी फायदेमंद? जानिए कब डाइट से मिलेगा लाभ और कब जरूरी है इलाज

अक्सर थकान, कमजोरी, चक्कर या थोड़ा काम करने पर सांस फूलने जैसी समस्याओं को लोग सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कई बार इसके पीछे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी यानी एनीमिया हो सकता है। एनीमिया की स्थिति में शरीर के अंगों और ऊतकों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, जिससे रोजमर्रा के काम भी मुश्किल लगने लगते हैं। खासकर महिलाओं और किशोरियों में आयरन की कमी से होने वाला एनीमिया एक आम समस्या है।

ऐसे में खान-पान को लेकर कई घरेलू उपाय बताए जाते हैं। चुकंदर, गुड़ और हरी सब्जियों के साथ भीगी हुई किशमिश खाने की सलाह भी अक्सर दी जाती है। माना जाता है कि किशमिश में मौजूद आयरन शरीर में खून बनाने में मदद कर सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या रोजाना भीगी किशमिश खाने से एनीमिया पूरी तरह ठीक हो सकता है?

आयरन का स्रोत है किशमिश

किशमिश में आयरन समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी होता है। यही वजह है कि संतुलित आहार में किशमिश को शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।

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अगर किसी व्यक्ति में हल्की आयरन की कमी भोजन में पोषक तत्वों की कमी के कारण हुई है, तो आयरन से भरपूर खाद्य पदार्थों के साथ किशमिश का सेवन कुछ मदद कर सकता है। हालांकि, इसे एनीमिया का इलाज मानना सही नहीं होगा।

सिर्फ किशमिश पर निर्भर रहना ठीक नहीं

एनीमिया के कई कारण हो सकते हैं। महिलाओं में अत्यधिक मासिक रक्तस्राव, आहार में आयरन की कमी, शरीर में आयरन का सही तरीके से अवशोषण न होना या कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं इसकी वजह बन सकती हैं।

अगर हीमोग्लोबिन काफी कम है या एनीमिया किसी अन्य कारण से हुआ है, तो केवल किशमिश या किसी एक खाद्य पदार्थ के सेवन से समस्या दूर नहीं होगी। ऐसे मामलों में कारण की पहचान और चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।

भीगी किशमिश खाने का क्या फायदा?

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किशमिश को पानी में भिगोने से वह नरम हो जाती है और कई लोगों के लिए इसे खाना एवं पचाना आसान हो सकता है। हालांकि, किशमिश को भिगोकर खाने से एनीमिया का इलाज होने का दावा नहीं किया जा सकता।

आयरन की कमी से बचने के लिए डाइट में किशमिश के साथ दालें, चना, राजमा, बीन्स, हरी पत्तेदार सब्जियां, सूखे मेवे और जरूरत के अनुसार मांस-मछली जैसे आयरन युक्त खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।

आयरन के साथ विटामिन-सी भी जरूरी

एनीमिया में केवल आयरन की मात्रा बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर आयरन को कितनी अच्छी तरह अवशोषित कर रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है। खासतौर पर पौधों से मिलने वाले आयरन के अवशोषण में विटामिन-सी मददगार हो सकता है।

इसलिए आयरन युक्त भोजन के साथ आंवला, नींबू, संतरा, अमरूद या अन्य विटामिन-सी युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना उपयोगी हो सकता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी?

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अगर लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर, त्वचा का पीला पड़ना, दिल की धड़कन तेज होना या सामान्य काम करने पर सांस फूलने जैसी समस्या रहती है, तो इसे केवल खान-पान की कमी मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर की सलाह से हीमोग्लोबिन और आवश्यक जांच कराना बेहतर है।

गंभीर एनीमिया की स्थिति में केवल भोजन के जरिए शरीर की आयरन जरूरत पूरी करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार आयरन सप्लीमेंट या अन्य उपचार की सलाह दे सकते हैं।

निष्कर्ष: किशमिश संतुलित आहार का हिस्सा बनकर आयरन की जरूरत पूरी करने में योगदान दे सकती है, लेकिन इसे एनीमिया की दवा या पूर्ण इलाज नहीं माना जाना चाहिए। लगातार या गंभीर लक्षण होने पर जांच और चिकित्सकीय सलाह सबसे जरूरी है।

नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी सप्लीमेंट या उपचार को डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू न करें।

(साभार)

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Author: Shakshi Negi
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