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हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत ने अपने पिता के उत्तराखंडियत को लेकर सोशल मीडिया पर उठाए ये सवाल

उत्तराखंड

हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत ने अपने पिता के उत्तराखंडियत को लेकर सोशल मीडिया पर उठाए ये सवाल

एक तरफ़ कांग्रेस के दो धुर्विरोधी नेता पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह की मुलाकात हो रही थी।जिसे देख लग रहा था की शायद अब कांग्रेस में कुछ हद तक चीजे सुधरते हुए दिखाई देगी।लेकिन दोनों नेताओं की मुलाकात के साथ ही पूर्व सीएम हरीश रावत के पुत्र आनंद रावत ने अपने पिता के उत्तराखंडियत को लेकर सोशल मीडिया में सवाल उठा दिए। आनंद रावत ने लिखा की “ दोपहर तक बिक गया बाज़ार में एक एक झूठ- हम शाम तक बैठे रहे अपनी सच्चाई लिए “

पिछले दिनो पिताजी का बयान कि “ उत्तराखंडीयत को एहमियत देने वाले लोग अब नही है “ सुनकर मेरा मन बहुत उद्वेलित हुआ इसका जवाब मुझे अगले दिन ही मिल गया जब उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने 3270 बाहर के प्रदेश की महिलाओं को पीसीएस की मुख्य परीक्षा की मेरिट लिस्ट से बाहर कर दिया और उत्तराखंड की महिलाओं को स्थाई निवास प्रमाण पत्र के आधार पर मुख्य परीक्षा में इम्तिहान लिखने का मौक़ा दिया ?

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लेकिन मेरा मन 2027 में होने वाली सम्भावित पीसीएस परीक्षा व अन्य चीज़ों में स्थाई प्रमाण पत्र से होने वाले लाभ के परिणामों के बारे में सोच कर, बैठ गया ? दरअसल 2012 से 2022 के मध्य उत्तराखंड में 45 लाख लोग बाहर के प्रदेश से उत्तराखंड में रहने आ गए है, और 2027 में इन सबका स्थाई प्रमाण पत्र बन जाएगा और उसके बाद ये मूल उत्तराखंडीयों के हक़ पर डाका डालेंगे ?

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क्या है ये उत्तराखंडीयत ?

स्थाई निवास प्रमाण पत्र शायद उत्तराखंडीयत शब्द का एक मुख्य भाग है, भू-क़ानून की अनुपस्थिति में ?

स्थाई प्रमाण पत्र या उत्तराखंडीयत के लाभ ?

१. प्रदेश के मेडिकल कालेज में रियायती दर पर 85 प्रतिशत आरक्षण के साथ पढ़ाई की सुविधा।

२. प्रदेश के तकनीकी कालेज में स्थाई निवास प्रमाण पत्र के लाभ

३. सरकारी नौकरी में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षितिज आरक्षण का लाभ ।

४. सरकारी योजनाओं जैसे गौरा कन्या धन व अन्य योजनाओं का लाभ स्थाई निवास प्रमाण पत्र धारक को ।

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लेकिन स्थाई निवास प्रमाण पत्र बनाने के शर्त ये है कि जो पिछले 15 वर्षों से राज्य में रह रहा है उसका स्थाई प्रमाण पत्र बन जाएगा ?

अब चूँकि केवल मेरे पिताजी उत्तराखंडीयत का राग अलापते है, तो उनको ही यहाँ के “ son of the soil “ यानी मूल निवासी चाहे पूरोला के हो या रूढ़की के उनके हितों की रक्षा करनी चाहिए ?

ऐसा नही होना चाहिए, जैसे 2015 में “ मैं युवाओं को परम्परागत खेलों की तरफ़ आकर्षित करते हुए उत्तराखंडीयत की अलख जगा रहा था और आप उत्तराखंडीयत के नाम पर “ खली का WWE का खेल करा रहे थे ?

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Author: Shakshi Negi
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