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पवित्र धामों में गैर हिन्दू प्रवेश मुद्दे पर, आस्था एवं विश्वास अनुरूप हो निर्णय- भट्ट

उत्तराखंड

पवित्र धामों में गैर हिन्दू प्रवेश मुद्दे पर, आस्था एवं विश्वास अनुरूप हो निर्णय- भट्ट

कांग्रेस नेता राजनैतिक कालनेमि, देवभूमि में रहकर करते हैं हर सनातनी कार्य का विरोध!

देहरादून। भाजपा ने पवित्र धामों में गैर हिन्दू प्रवेश के मुद्दे पर धार्मिक आस्था और देवभूमि छवि अनुरूप निर्णय पर जोर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट ने इस विषय पर कांग्रेसी बयानों को कड़ी आलोचना करते हुए कहा, जिन्हें तीर्थाटन और पर्यटन का अंतर नहीं मालूम, उनके लिए चारों धामों का महत्व सिर्फ आर्थिकी तक समिति है। वहीं हैरानी जताई तमाम स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर, जो देवभूमि में राजनीति हैं और हर अच्छे सनातनी निर्णय को बाधित करने का पाप करते हैं।

उन्होंने हाल फिलहाल में हरिद्वार के बाद चार धामों में गैर सनातनी प्रवेश के विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, धार्मिक जन आस्था, विश्वास और परंपरा मान्य होनी चाहिए। संबंधित पावन धामों से जुड़े तीर्थ पुरोहित, स्थानीय पुजारी एवं अन्य लोग या धर्मावलंबी यदि प्रवेश को लेकर नियम बनाना चाहते हैं इसमें कुछ भी गलत नहीं है। हालांकि इस तरह का प्रतिबंध अनेकों स्थानों पर जनसहयोग से अनेकों स्थानों पर है। यहां बेहद स्पष्ट है कि जिसकी धार्मिक स्थलों के प्रति कोई भी आस्था, विश्वास या धार्मिक जुड़ाव नहीं है तो वे किस मकसद से वहां जाएंगे। दरअसल मंदिर एक सार्वजनिक सामूहिक पूजा स्थल है, लिहाजा वहां सिर्फ घूमने के नाम पर अव्यावहारिक व्यवहार सामने आने या माहौल खराब होने की अनुमति किसी को नहीं दी सकती है।

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उन्होंने कांग्रेस नेताओं और विशेषकर गणेश गोदियाल के उस बयान की कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने चार धामों को घूमने फिरने से जोड़ा। कटाक्ष करते हुए कहा, लगता है कांग्रेस का सनातन से दूर दूर तक नाता नहीं है, तभी वे तीर्थाटन और पर्यटन में अंतर महसूस नहीं करते। तभी वे चार धाम की पवित्रता और परंपरा पर आर्थिकी को तरजीह देने की बात कहते हैं। उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा, हम भी जानते हैं कि प्रदेश की आर्थिकी में चार धाम यात्रा की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन पावन स्थलों के अंदर तो सब प्रक्रिया तो सनातनी परिप्रेक्ष्य में ही होनी चाहिए। इसीलिए तो राज्य निर्माण के बाद जनभावना के अनुशार पर्यटन के साथ तीर्थाटन को भी महत्व दिया गया। निसंदेह प्रदेश में पर्यटन की असीम संभावना है, लेकिन धार्मिक स्थलों में आस्था, विश्वास एवं परंपरा के अनुसार ही पर्यटन होना चाहिए, जिसे तीर्थाटन ही कहते हैं।

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वहीं उन्होंने राज्य कांग्रेस नेताओं के ऐसे तमाम मुद्दों पर अपनाए हुए रुख पर हैरानी और निराशा जताई। कहा, ये सब उत्तराखंडित के मुद्रा पर देवभूमि में राजनीति का दावा करते हैं, लेकिन वावजूद इसके प्रत्येक सनातनी निर्णय का विरोध भी करते हैं। इन्हें धार्मिक स्थलों में प्रवेश के नियमों में आपत्ति है, यूसीसी में दिक्कत है, धर्मांतरण कानून नहीं चाहिए, अवैध धार्मिक अतिक्रमण का विरोध नहीं करना चाहते हैं, धार्मिक स्थलों के विकास के उलट उनकी छवि खराब करने में आनंद आता है। इसी तरह डेमोग्राफी बनाए रखने या लव, लैंड जिहाद पर कार्रवाई की बात हो, प्रत्येक मुद्दे पर उत्तराखंडीयत का ढोंग करने वाले देवभूमि के कांग्रेस नेताओं को ही दिक्कत होती है। लेकिन प्रदेश की राष्ट्रवादी और सनातन जनता कांग्रेस और विपक्ष के नजरिए को अच्छी तरह देख रही और आने वाले समय में पूर्व की भांति ही इन राजनैतिक कालनेमियों को लोकतांत्रिक सजा देगी।

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Author: Shakshi Negi
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