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तीन हफ्ते से नहीं भर रहा मुंह का घाव? हो सकता है ओरल कैंसर का संकेत

स्वास्थ्य

तीन हफ्ते से नहीं भर रहा मुंह का घाव? हो सकता है ओरल कैंसर का संकेत

मुंह में छाले होना आम बात मानी जाती है और अधिकतर लोग इसे पेट की गड़बड़ी या विटामिन की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मुंह का कोई छाला लंबे समय तक ठीक न हो या बार-बार उसी जगह पर घाव बन रहा हो, तो यह गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर सकता है। खासकर तीन सप्ताह से अधिक समय तक बने रहने वाले छाले को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है।

चिकित्सकों के अनुसार, लंबे समय तक न भरने वाले घाव ओरल कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकते हैं। भारत में मुंह का कैंसर तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है, जिसके पीछे तंबाकू, गुटखा, सुपारी और शराब का सेवन प्रमुख कारण माना जाता है। शुरुआती दौर में यह बीमारी अक्सर बिना दर्द के सफेद या लाल धब्बों के रूप में दिखाई देती है, जिसे लोग सामान्य छाला समझकर अनदेखा कर देते हैं। समय पर इलाज न होने की स्थिति में कैंसर जबड़े, गले और शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है।

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सामान्य छाले और कैंसर के घाव में क्या है फर्क

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सामान्य छाले दर्दनाक होते हैं और कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाते हैं। वहीं कैंसर से जुड़े शुरुआती घाव अधिकतर दर्द रहित होते हैं और लंबे समय तक बने रहते हैं। यदि छाले के साथ मुंह में गांठ महसूस हो, दांत ढीले होने लगें, आवाज में बदलाव आए या मुंह खोलने में परेशानी हो, तो तुरंत जांच कराना जरूरी है। इसकी पुष्टि केवल बायोप्सी जांच से ही संभव होती है।

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तंबाकू और सुपारी से बढ़ता है खतरा

आंकड़ों के मुताबिक भारत में ओरल कैंसर के अधिकांश मामलों में तंबाकू सेवन अहम भूमिका निभाता है। तंबाकू में मौजूद हानिकारक तत्व मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं। वहीं सुपारी चबाने से मुंह की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं और धीरे-धीरे मुंह खुलना कम हो जाता है, जिसे गंभीर चेतावनी संकेत माना जाता है। शराब का सेवन इस खतरे को और बढ़ा देता है।

इन लक्षणों पर तुरंत दें ध्यान

ओरल कैंसर के अन्य लक्षणों में निगलने में दिक्कत, बिना वजह कान में दर्द, गले में सूजन, मुंह के अंदर सफेद या लाल पैच, जीभ सुन्न होना या हिलाने में परेशानी शामिल हैं। कई मामलों में गले या जबड़े में ऐसी गांठ बनती है जिसमें दर्द नहीं होता, जिससे मरीज को बीमारी का आभास देर से होता है।

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समय पर पहचान से बचाई जा सकती है जान

विशेषज्ञों का कहना है कि ओरल कैंसर के इलाज में शुरुआती पहचान सबसे अहम है। यदि पहली अवस्था में बीमारी का पता चल जाए, तो इलाज के बाद मरीज के पूरी तरह स्वस्थ होने की संभावना काफी अधिक होती है। तंबाकू और शराब से दूरी बनाना, नियमित डेंटल जांच कराना और मुंह में किसी भी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करना ही सबसे बड़ा बचाव है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है।

(साभार)

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Author: Shakshi Negi
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