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पश्चिम एशिया में तनाव पर सरकार चिंतित, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता- एस जयशंकर

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पश्चिम एशिया में तनाव पर सरकार चिंतित, भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता- एस जयशंकर

राज्यसभा में बोले एस जयशंकर, पश्चिम एशिया के हालात पर सरकार सतर्क

नई दिल्ली। राज्यसभा में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वहां फंसे भारतीय नागरिकों के मुद्दे पर चर्चा के दौरान विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

सदन में बयान देते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भारत ने पहले ही चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहे हैं और संबंधित मंत्रालय आपसी समन्वय के साथ आवश्यक कदम उठा रहे हैं।

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जयशंकर ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते हैं और यह क्षेत्र देश की ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख स्रोत भी है। उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, जबकि ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। ऐसे में क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।

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उन्होंने बताया कि मौजूदा संकट के कारण सुरक्षा हालात प्रभावित हुए हैं और इसका असर आम जनजीवन पर भी पड़ा है। इस दौरान भारत ने अपने दो नाविकों को खो दिया है, जबकि एक नाविक अभी भी लापता बताया जा रहा है।

विदेश मंत्री ने कहा कि ईरान में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा के लिए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास लगातार सक्रिय है। वहां पढ़ रहे छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने में मदद की जा रही है और जरूरतमंद नागरिकों को पड़ोसी देशों के रास्ते स्वदेश लौटने में सहायता दी जा रही है। अब तक हजारों भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच चुके हैं।

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उन्होंने यह भी बताया कि मौजूदा हालात में ईरान के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क करना चुनौतीपूर्ण है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत के सहयोग के लिए आभार जताया है। भारत ने मानवीय आधार पर ईरान के युद्धपोत ‘लवन’ को कोच्चि बंदरगाह पर रुकने की अनुमति दी थी, जिसके लिए ईरान ने धन्यवाद दिया है।

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Author: Shakshi Negi
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