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सात मोड़ में पेड़ कटान के विरोध में पर्यावरणविदों का मोर्चा

उत्तराखंड

सात मोड़ में पेड़ कटान के विरोध में पर्यावरणविदों का मोर्चा

बोले- बढ़ेगा मानव-वन्यजीव संघर्ष

देहरादून। ऋषिकेश के सात मोड़ क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण के लिए पेड़ कटान के विरोध में पर्यावरणविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने मोर्चा खोल दिया है। देहरादून प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने सड़क चौड़ीकरण की योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सात मोड़ क्षेत्र हाथियों के महत्वपूर्ण आवागमन मार्गों में शामिल है। यहां पेड़ों की कटाई और निर्माण कार्य से वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास प्रभावित होगा, जिससे आने वाले वर्षों में मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ सकता है।
पर्यावरणविद् हिमांशु अरोड़ा ने कहा कि सात मोड़ और थानों क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण से हाथियों के आवास और उनके पारंपरिक आवागमन मार्ग प्रभावित होंगे। उन्होंने

कहा कि जंगलों को लगातार कंक्रीट में बदलने से वन्यजीवों के पास आबादी की ओर जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
अनूप नौटियाल ने आरटीआई से प्राप्त आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि राज्य गठन के बाद उत्तराखंड में हुए वन कटान का 47 प्रतिशत हिस्सा अकेले देहरादून जिले में हुआ है। उन्होंने कहा कि इसी तरह जंगलों का दोहन जारी रहा तो देहरादून आने वाले समय में कंक्रीट के जंगल में बदल जाएगा।

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ऋषिकेश की पर्यावरण कार्यकर्ता शैफी ने कहा कि सात मोड़ पर यातायात का इतना दबाव नहीं है कि बड़े पैमाने पर जंगल काटकर सड़क चौड़ी करने की जरूरत पड़े। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान कई वर्षों तक होने वाली आवाजाही और शोर से हाथियों समेत अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार पर असर पड़ेगा।

एनएचएआई की योजना पर उठाए सवाल, रात में मार्ग बंद करने का विकल्प
वक्ताओं ने नेपाली फार्म-देहरादून फोरलेन मार्ग के बावजूद सात मोड़ में नया मार्ग विकसित किए जाने के औचित्य पर भी सवाल उठाए। शिल्पी ने कहा कि जब नेपाली फार्म से देहरादून जाने वाला फोरलेन मार्ग पहले से मौजूद है तो समानांतर सड़क बनाने की जरूरत और उससे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
ओमिनी ने सुझाव दिया कि सात मोड़ मार्ग को रात 8 बजे से सुबह 6 बजे तक यातायात के लिए बंद रखा जा सकता है। इस दौरान वाहनों को नेपाली फार्म-देहरादून फोरलेन मार्ग से डायवर्ट कर वन्यजीवों को रात में सुरक्षित आवागमन का अवसर दिया जा सकता है।

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नितिन ने सड़क को सीधा करने से दुर्घटनाएं कम होने के तर्क पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चौड़ी सड़कों पर वाहनों की रफ्तार बढ़ने से दुर्घटनाओं का जोखिम भी बढ़ सकता है।

विरोध कर रहे युवाओं ने आंदोलन की आगामी रणनीति की जानकारी देते हुए बताया कि 15 अगस्त को सात मोड़ पर जागरूकता एवं देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। रक्षाबंधन पर जंगल में पेड़ों को रक्षासूत्र बांधकर उन्हें बचाने का संकल्प लिया जाएगा। 9 सितंबर को हिमालय दिवस पर ‘यह कैसा हिमालय दिवस?’ शीर्षक से कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा प्रत्येक रविवार को सात मोड़ पर विरोध-प्रदर्शन और जागरूकता अभियान जारी रहेगा।
प्रेस वार्ता में जया सिंह, इरा चौहान, रूचि सिंह, अनीश लाल, संजय, वासु खन्ना, शिल्पी और कनीश मौजूद रहे।

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Author: Shakshi Negi
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