Connect with us

उत्तराखंड में सूखे जैसे हालात, कम बारिश-बर्फबारी से खेती, पर्यटन और पर्यावरण पर संकट

उत्तराखंड

उत्तराखंड में सूखे जैसे हालात, कम बारिश-बर्फबारी से खेती, पर्यटन और पर्यावरण पर संकट

 देहरादून/चमोली/श्रीनगर। उत्तराखंड में इस सर्दी मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला नजर आ रहा है। सामान्य से बेहद कम बारिश और बर्फबारी ने राज्य की आर्थिकी, खेती और पर्यावरण तीनों को गंभीर चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। पहाड़ी इलाकों में जहां आमतौर पर दिसंबर में बर्फ की मोटी परत जम जाती थी, वहीं इस बार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी जमीन सूखी पड़ी है।

सबसे चौंकाने वाली स्थिति 12 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ क्षेत्र में सामने आई है, जहां जनवरी के मध्य तक भी बर्फ नहीं गिरी। स्थानीय लोगों और वैज्ञानिकों के अनुसार यह पहली बार है जब तुंगनाथ क्षेत्र पूरी तरह बर्फविहीन रहा है। विशेषज्ञ इसे बदलते जलवायु चक्र का गंभीर संकेत मान रहे हैं।

यह भी पढ़ें -  उत्तराखंड को मिला ‘Best State for Promotion of Aviation & Ecosystem’ का बड़ा सम्मान

खेती पर सबसे ज्यादा मार

बारिश न होने से पर्वतीय और मैदानी जिलों में सूखे जैसे हालात बनने लगे हैं। कृषि विभाग की रिपोर्ट बताती है कि गेहूं की फसल को कई जिलों में 15 से 25 प्रतिशत तक नुकसान पहुंच चुका है। उत्तरकाशी, चमोली, टिहरी, देहरादून, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में फसल की बढ़वार प्रभावित हुई है।
पर्वतीय क्षेत्रों में अधिकांश खेती असिंचित है और पूरी तरह वर्षा पर निर्भर रहती है। ऐसे में बारिश के अभाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। कई जगह फसल का जमाव कमजोर है और पत्तियां पीली पड़ने लगी हैं।

बागवानी और सेब उत्पादन पर भी खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि बर्फबारी न होने से सेब और अन्य फलों की पैदावार पर भी असर पड़ सकता है। सेब की फसल के लिए 1000 से 1500 घंटे का शीतलन जरूरी होता है, जो इस बार पूरा होता नहीं दिख रहा। इससे आने वाले मौसम में उत्पादन घटने की आशंका जताई जा रही है।

यह भी पढ़ें -  एमडीडीए का अवैध निर्माणों पर सख़्त प्रहार, सीलिंग व ध्वस्तीकरण की कार्यवाही तेज

जड़ी-बूटियों का प्राकृतिक चक्र प्रभावित

तुंगनाथ स्थित गढ़वाल विश्वविद्यालय के एल्पाइन रिसर्च सेंटर में दुर्लभ औषधीय पौधों पर हो रहे शोध भी प्रभावित हुए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार अल्पाइन क्षेत्र की कई जड़ी-बूटियां शीतकालीन बर्फ पर निर्भर रहती हैं। बर्फ न होने से उनके अंकुरण, वृद्धि और औषधीय गुणों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

बढ़ती वनाग्नि ने बढ़ाई चिंता

बारिश और बर्फबारी के अभाव में जंगलों की नमी खत्म हो रही है, जिससे आग की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। वन विभाग के अनुसार नवंबर के बाद से प्रदेश में तीन दर्जन से अधिक वनाग्नि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें कई हेक्टेयर वन क्षेत्र को नुकसान पहुंचा है।

यह भी पढ़ें -  सीएम धामी ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी से की शिष्टाचार भेंट

मौसम विभाग ने दी उम्मीद

मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है और जनवरी के दूसरे सप्ताह के बाद बारिश व बर्फबारी की संभावना बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द मौसम में बदलाव नहीं हुआ तो इसका असर आने वाले महीनों में और गहरा हो सकता है।

कुल मिलाकर, उत्तराखंड इस समय मौसम की असामान्य परिस्थितियों से जूझ रहा है, जिसका असर सिर्फ वर्तमान पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की आजीविका और पर्यावरण संतुलन पर भी पड़ सकता है।

Ad Ad
Continue Reading

More in उत्तराखंड

Ad Ad

Latest News

Author

Author: Shakshi Negi
Website: www.gairsainlive.com
Email: gairsainlive@gmail.com
Phone: +91 9720310305