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Big news :- जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों के काम नही आ रहा गोल्डन कार्ड , कर्मचारी नाराज

उत्तराखंड

Big news :- जरूरत पड़ने पर कर्मचारियों के काम नही आ रहा गोल्डन कार्ड , कर्मचारी नाराज

उत्तराखंड के समस्त कर्मचारियों शिक्षकों तथा पेंशनर के लिए राज्य सरकार द्वारा आयुष्मान योजना प्रारंभ की गई है जिसके तहत सभी कर्मचारियों,शिक्षकों तथा पेंशनरों के गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं परंतु बड़े खेद का विषय है कि गोल्डन कार्ड को जब अस्पतालों में ले जाया जा रहा है तो अस्पताल उसके तहत इलाज करने से मना कर रहे हैं जबकि वह अस्पताल राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा सूचीबद्ध है ।वर्तमान समय में कोरोना महामारी का प्रकोप जारी है ऐसे में तमाम कर्मचारी, शिक्षक इस कार्ड को लेकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं दर-दर भटक रहे हैं परंतु अस्पताल इसके तहत इलाज करने को मना कर रहे हैं। आयुष्मान योजना में आ रही तमाम समस्याओं को लेकर राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष डी,के कोटिया तथा मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणेंद्र चौहान जी की अध्यक्षता में उत्तराखंड के तमाम कर्मचारी, शिक्षकों तथा पेंशनरों की बैठक 20 फरवरी 2021 को आहूत की गई थी जिसमें समस्त कर्मचारियों, शिक्षकों द्वारा योजना में सुधार हेतु सुझाव दिए गए थे जिस पर प्राधिकरण के अध्यक्ष द्वारा एक माह के अंदर संशोधित शासनादेश जारी करने का आश्वासन दिया गया था, परंतु बड़े खेद का विषय है 3 माह बीत जाने पर भी अभी तक कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है और राज्य के तमाम शिक्षक,कर्मचारी तथा पेंशनर इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं । जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ द्वारा योजना में सुधार हेतु निम्न सुझाव दिए गए थे
1- ओपीडी में इलाज की कैशलेस सुविधा की जाए तथा दवाइयों पर होने वाले व्यय का भी भुगतान किया जाए। 2-कुछ महिलाएं ऐसी हैं जो कि विधवा हैं ऐसे में सास ससुर के पालन पोषण की जिम्मेदारी उन पर होती है परंतु शासनादेश के अनुसार सास-ससुर को आश्रित में सम्मिलित नहीं किया गया है अतः ऐसी परिस्थिति में सास ससुर को योजना में सम्मिलित किया जाए।
3-पेंशनरों के अंशदान को कम किया जाए।
4-आश्रित की श्रेणी में आने वालों की आयु सीमा समाप्त की जाए।
5 -योजना में जिन अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया है उनमें उपलब्ध सभी रोगों के इलाज की सुविधा प्रदान कराई जाए।। इसी तरह कई अस्पताल जो योजना में सूचीबद्ध हैं जब वहां पर मरीज जा रहा है तो उनके द्वारा कहा जा रहा है कि हम योजना में शामिल नहीं हैं जबकि उन अस्पतालों को सूचीबद्ध किया गया हैं ,अतः ऐसे अस्पतालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए ।
6-राज्य में पंजीकृत अस्पतालों की संख्या को बढ़ाया जाए मैक्स, कैलाश तथा फोर्टिज जैसे अन्य अस्पतालों को योजना में शामिल किया जाए।
7- जिन अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा दी जा रही है वहां भी कम पैकेज के चलते बेहतर सुविधा देने में लापरवाही बरती जा रही है, अतः पैकेज की राशि को बढ़ाया जाए।
8- योजना की वेबसाइट लॉन्च की जाए इसमें योजना से जुड़ी सभी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
9- शिकायतों के निस्तारण को एक सेल का गठन किया जाए।
10- पहाड़ी क्षेत्र के छोटे शहरों के निजी अस्पतालों को भी योजना में सूचीबद्ध किया जाए।
11-पैथोलॉजी लैबों को भी योजना में सूचीबद्ध किया जाए।
12-आयुर्वेदिक तथा होम्योपैथिक चिकित्सा को भी योजना में शामिल किया जाए।
13-कोविड से ग्रसित कर्मचारियों तथा शिक्षकों का इलाज योजना के अंतर्गत निशुल्क किया जाए।
14-सूचीबद्ध अस्पतालों द्वारा इलाज से मना करने पर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तराखंड के प्रदेश कोषाध्यक्ष सतीश घिल्डियाल ने राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के अध्यक्ष से मांग की है कि उक्त सुझाओं को सम्मिलित करते हुए शीघ्र संशोधित शासनादेश जारी किया जाए अन्यथा प्रदेश के समस्त कर्मचारी शिक्षक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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