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Big breaking:-धर्मपुर – ‘अनुभवी’ और ‘अग्रेसिव’ नेताओं के बीच होगा इस बार रोचक मुकाबला

उत्तराखंड

Big breaking:-धर्मपुर – ‘अनुभवी’ और ‘अग्रेसिव’ नेताओं के बीच होगा इस बार रोचक मुकाबला

 

देहरादून। दून की धर्मपुर सीट स्पष्ट तौर से जिले में एकमात्र सीट है जिस पर मुकाबला भाजपा-कांग्रेस के किन दावेदारों में होना है यह पहले से तय है। भाजपा से सिटिंग विधायक विनोद चमोली तो कांग्रेस से पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश अग्रवाल इस सीट पर जोर आजमाईश करते दिखेंगे। ये बात अलग है कि दोनों दलों से कुछ एक नेता और भी दावेदारी जता रहे हैं लेकिन इनके दावों में दम कम और हल्कापन ज्यादा दिखता है।

 

 

 

दून की धर्मपुर सीट वोटर्स के लिहाज से भी सर्वाधिक इंटरेस्टिंग है। बंजारावाला से लेकर मोथरोवाला, दून यूनिवर्सिटी रोड से लेकर बायपास पर अधिकांश हिन्दू गढ़वाली आबादी की बसाकत है तो माजरा से लेकर isbt, शिमला बायपास इलाके में यह सीट मुस्लिम बहुल है। गढ़वाली बहुल इलाके में जहां भाजपा मजबूत दिखती है तो मुस्लिम बहुल में कांग्रेस upper हैंड है।

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बात दावेदारों की करें तो कांग्रेस से दिनेश अग्रवाल को लेकर पिछले कुछ समय से उनकी निष्क्रियता को लेकर संशय की स्थिति थी लेकिन अब लगभग यह तय है कि वे ही इस सीट पे कांग्रेस के झंडाबरदार होंगे। यूं भी दिनेश अग्रवाल कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हैं। कांग्रेस सरकारों में वे बेहतर पोर्टफोलियो के साथ दो बार के मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा 2017 की मोदी लहर को किनारे कर दें तो इस सीट पर उनका भी जल्दी से कोई तोड़ नहीं है। जाहिर तौर से इस सीट पर वे ही कांग्रेस के सर्वाधिक मजबूत दावेदार हैं।

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भाजपा में भी कमोबेश विनोद चमोली के रूप में स्पष्ट दावेदार मौजूद हैं। यहां से भूपेंद्र कंडारी और वीर सिंह पंवार टिकट तो मांग रहे हैं लेकिन चमोली के कद और अनुभव दोनों के आगे इनकी दावेदारी शुरू में ही दम तोड़ती दिखती है। विनोद चमोली 2017 की मोदी लहर में पहली बार इस सीट से विधायक चुने गए। नगर पालिका अध्यक्ष से लेकर दो बार दून के मेयर रह चुके चमोली न केवल कुशल वक्ता बल्कि agressive भी माने जाते हैं। अपनी कुशल प्रशासनिक क्षमताओं का लोहा वे देहरादून नगर निगम में मनवा चुके हैं।

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ऐसे में स्पष्ट रूप से मुकाबला चमोली व अग्रवाल के मध्य तय है। यहां ये बात भी दीगर है कि इन दोनों नेताओं में राजनीतिक प्रतिद्वंदता के चर्चे खूब होते रहे हैं। शब्दों के बान चलाकर कैसे एक दूसरे को ढेर किया जाता है ये दोनों बखूबी जानते भी हैं और कई मंचों पर देखने को भी मिल चुका है। पिछले 5 साल में चमोली ने विगत दशकों में अपनी खामियों को दूर करते हुए यहां अच्छी पकड़ बना ली लेकिन दिनेश अग्रवाल का अनुभव भी कम नहीं है। ऐसे में इस सीट पर पहली बार रोचक मुकाबला देखने को मिल सकता है।

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