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7-9 घंटे की नींद क्यों है जरूरी? कम सोना बढ़ा सकता है कई रोगों का खतरा

स्वास्थ्य

7-9 घंटे की नींद क्यों है जरूरी? कम सोना बढ़ा सकता है कई रोगों का खतरा

भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग अक्सर नींद को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यही आदत धीरे-धीरे कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर दिन 7-9 घंटे की गहरी नींद न केवल शरीर को आराम देती है, बल्कि यह स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया भी है।

अच्छी नींद शरीर के लिए किसी प्राकृतिक दवा से कम नहीं है। सोते समय शरीर खुद को रिपेयर करता है, दिमाग दिनभर की जानकारी को व्यवस्थित करता है और ऊर्जा को फिर से संचित करता है। लेकिन जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो इसके नकारात्मक असर तुरंत नजर आने लगते हैं।

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अगर एक-दो दिन भी नींद पूरी न हो पाए, तो व्यक्ति को थकान, सुस्ती, सिरदर्द और चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है। वहीं, लंबे समय तक नींद की कमी रहने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। रिसर्च के मुताबिक, लगातार कम नींद लेने से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा और हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

नींद पूरी न होने का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। ऐसे लोगों में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है और काम में मन नहीं लगता।

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बच्चों और युवाओं में नींद की कमी का असर और भी ज्यादा गंभीर हो सकता है। इससे उनकी याददाश्त, सीखने की क्षमता और व्यवहार में बदलाव देखने को मिल सकता है।

नींद की कमी के संकेत
नींद पूरी न होने पर शरीर कई तरह के संकेत देता है। लगातार थकान रहना, आंखों में जलन, मांसपेशियों में दर्द, बार-बार बीमार पड़ना इसके सामान्य लक्षण हैं। वहीं मानसिक रूप से चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग, ध्यान की कमी और उदासी जैसी समस्याएं भी सामने आती हैं।

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इसके अलावा, दिन में बार-बार नींद आना, काम के दौरान ध्यान न लगना, याददाश्त कमजोर होना और छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना भी नींद की कमी के संकेत हो सकते हैं। अगर ये लक्षण लगातार बने रहते हैं, तो इसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।

ऐसी स्थिति में समय रहते डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है, ताकि समस्या की सही पहचान कर इलाज किया जा सके और गंभीर बीमारियों से बचाव हो सके।

नोट: यह जानकारी विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और अध्ययनों के आधार पर तैयार की गई है।

(साभार)

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Author: Shakshi Negi
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