Connect with us

डायबिटीज, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल से क्यों बढ़ जाता है लिवर खराब होने का खतरा? आइये जानते हैं

स्वास्थ्य

डायबिटीज, हाई बीपी और कोलेस्ट्रॉल से क्यों बढ़ जाता है लिवर खराब होने का खतरा? आइये जानते हैं

तेज रफ्तार जीवन, असंतुलित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी ने बीते कुछ वर्षों में लिवर से जुड़ी बीमारियों का जोखिम तेजी से बढ़ा दिया है। स्थिति यह है कि अब केवल बुजुर्ग ही नहीं, बल्कि युवा और बच्चे भी लिवर संबंधी समस्याओं की चपेट में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते जीवनशैली में सुधार न किया जाए, तो लिवर की छोटी परेशानियां भी गंभीर रूप ले सकती हैं।

लिवर हमारे शरीर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंग है, जो विषैले तत्वों को बाहर निकालने, पाचन और चयापचय जैसी अहम प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है। लिवर से जुड़ी बीमारियां जैसे फैटी लिवर या सिरोसिस न केवल जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं, बल्कि कई मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।

पहले से मौजूद बीमारियां बढ़ा सकती हैं लिवर का खतरा

यह भी पढ़ें -  गर्मियों में क्यों होती है आंखों में जलन और खुजली? जानिए कारण और बचाव के उपाय

विशेषज्ञ बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों से ग्रसित है और उन्हें नियंत्रित नहीं करता, तो इसका सीधा असर लिवर की सेहत पर पड़ सकता है। इन बीमारियों की अनियंत्रित स्थिति लिवर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है, जिससे गंभीर रोग विकसित हो सकते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जिन लोगों को मधुमेह, उच्च रक्तचाप या बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, उन्हें नियमित जांच करानी चाहिए। ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर और लिपिड प्रोफाइल के साथ-साथ समय-समय पर लिवर, किडनी और आंखों की जांच भी जरूरी मानी जाती है, क्योंकि इन अंगों पर इन बीमारियों का सबसे अधिक असर पड़ता है।

डायबिटीज और लिवर रोगों का गहरा संबंध

डायबिटीज से पीड़ित लोगों में लिवर से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक देखा गया है। जिस तरह मधुमेह किडनी को प्रभावित करता है, उसी प्रकार यह लिवर की कार्यप्रणाली को भी नुकसान पहुंचा सकता है। डायबिटिक मरीजों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज विकसित होने की आशंका अधिक रहती है, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है।

यह भी पढ़ें -  गर्मी के मौसम में ग्रीन-टी पीना सही या गलत? जानिए एक्सपर्ट की राय

अध्ययनों के अनुसार, सिरोसिस से पीड़ित अधिकांश मरीजों में ग्लूकोज इंटॉलरेंस या डायबिटीज की समस्या पाई जाती है। इसी कारण विशेषज्ञ ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखने पर विशेष जोर देते हैं।

हाई ब्लड प्रेशर भी लिवर के लिए खतरा

आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर को हृदय रोगों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन शोध बताते हैं कि यह लिवर सिरोसिस जैसी बीमारियों को भी बढ़ा सकता है। सिरोसिस की स्थिति में लिवर में रक्त प्रवाह बाधित होता है, जिससे पोर्टल वेन पर दबाव बढ़ता है। इस स्थिति को पोर्टल हाइपरटेंशन कहा जाता है, जो लिवर के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसलिए उच्च रक्तचाप को नियंत्रित रखना बेहद आवश्यक है।

यह भी पढ़ें -  गर्मियों में भी बढ़ सकता है अस्थमा अटैक का खतरा, विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और लिवर की सेहत

हाई कोलेस्ट्रॉल केवल दिल ही नहीं, बल्कि लिवर के लिए भी नुकसानदायक होता है। सामान्य स्थिति में लिवर अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल को प्रोसेस कर बाहर निकाल देता है, लेकिन अत्यधिक वसायुक्त आहार लेने से यह क्षमता प्रभावित हो जाती है। इसके कारण फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है, जो समय के साथ गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है।

शोध बताते हैं कि शरीर में अतिरिक्त कोलेस्ट्रॉल फैटी लिवर डिजीज की गंभीरता को और बढ़ा सकता है।

नोट: यह लेख विभिन्न मेडिकल रिपोर्ट्स और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है।

(साभार)

Ad Ad
Continue Reading

More in स्वास्थ्य

Ad Ad

Latest News

Author

Author: Shakshi Negi
Website: www.gairsainlive.com
Email: gairsainlive@gmail.com
Phone: +91 9720310305