Connect with us

पीएम मोदी के नाम पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी और पेड़ काटने से लेकर अवैध निर्माण, IFS अधिकारियों पर गिरेगी गाज

उत्तराखंड

पीएम मोदी के नाम पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में टाइगर सफारी और पेड़ काटने से लेकर अवैध निर्माण, IFS अधिकारियों पर गिरेगी गाज

विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के तहत पाखरों रेंज में जिस टाइगर सफारी के निर्माण को वन विभाग के कुछ आला अफसरों की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया जा रहा था, दरअसल उसकी जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय को थी ही नहीं।

पीएमओ ने इस संबंध में उत्तराखंड शासन या वन विभाग को कभी कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किए थे। बताया जा रहा है कि तीन आईएफएस अधिकारियों पर गाज के गिरने के बाद अब इसकी भी जांच हो सकती है कि किसने इस प्रोजेक्ट के साथ प्रधानमंत्री का नाम जोड़ा। बताया तो यहां तक जा रहा है उल्टे पीएमओ ने इस मामले में एतराज भी जताया था। शासन स्तर से लेकर वन मुख्यालय स्तर तक कहीं कोई ऐसा आदेश या गाइडलाइन प्राप्त नहीं हुई, जिसमें पीएमओ के स्तर से कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पाखरों रेंज में टाइगर सफारी के निर्माण का कोई आदेश हो।

यह भी पढ़ें -  चमोली में भारी बर्फबारी से जनजीवन अस्त-व्यस्त, 77 से अधिक गांव प्रभावित

जब टाइगर सफाई का काम शुरू हुआ था, तात्कालीन पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ ने इस संबंध में कॉर्बेट निदेशक से पीएमओ के ड्रीम प्रोजेक्ट संबंधी किसी पत्र के बारे जानकारी मांगी थी, लेकिन कॉर्बेट निदेशक ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा पाए थे।

अब जब यह बात साफ हो गई है कि पीएम मोदी का नाम इस्तेमाल करके टाइगर सफारी के नाम पर पेड़ काटने से लेकर अवैध निर्माण और तमाम अनियमितताएं की गईं, तो इस बात की भी आशंका जताई जा रही है कि इस मामले में दूसरे अधिकारी भी नप सकते हैं। बताया जा रहा है कि पीएमओ पहले ही इस मामले का संज्ञान ले चुका है कि किसके स्तर से पीएम मोदी का नाम इस प्रोजेक्ट में डाला गया।

यह भी पढ़ें -  सीएम धामी ने ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ का किया फ्लैग ऑफ

अनियमितताओं पर नजर डाले तो :

– कॉर्बेट टाइगर रिजर्व पार्क के तहत कंडी रोड निर्माण, मोरघट्टी और पाखरों वन विश्राम गृह परिसर में भवनों का निर्माण, पाखरों वन विश्राम गृह के समीप जलाशय का निर्माण किया गया था। इसके अलावा पाखरों में प्रस्तावित टाइगर सफारी में वृक्षों के अवैध पातन किया था। जिस पर एनटीसीए के जांच दल ने कार्रवाई की आख्या प्रस्तुत की थी।

यह भी पढ़ें -  गणतंत्र दिवस पर सूचना विभाग की झांकी ने लगातार तीसरी बार हासिल किया प्रथम स्थान

– टाइगर सफारी निर्माण के लिए मात्र 163 पेड़ काटे जाने थे, लेकिन अनुमति से कहीं अधिक पेड़ काट दिए गए।

– इसके अलावा कंडी रोड का निर्माण, मोरघट्टी और पाखरो वन विश्राम गृह परिसर में भवनों का निर्माण, जलाशय का निर्माण, टाइगर सफारी, वृक्षों का पातन के संबंध में वैज्ञानिक, प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति तक नहीं ली गई।

– यहां कंक्रीट का ढांचा खड़ा किया गया, जो अवैध था। हालांकि बाद में इस गिरा दिया गया था।

Ad Ad
Continue Reading

More in उत्तराखंड

Ad Ad

Latest News

Author

Author: Shakshi Negi
Website: www.gairsainlive.com
Email: gairsainlive@gmail.com
Phone: +91 9720310305