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नगर निकायों पर कब्जा हुआ तो मराठी मानूस होगा कमजोर- राज ठाकरे

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नगर निकायों पर कब्जा हुआ तो मराठी मानूस होगा कमजोर- राज ठाकरे

राज ठाकरे का बीजेपी पर बड़ा हमला, मुंबई को लेकर जताई साजिश की आशंका

मुंबई। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर कड़ा हमला बोलते हुए केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की सोच रखने वाली ताकतें आज सत्ता में हैं और यदि नगर निकायों पर भी उनका नियंत्रण हो गया, तो मराठी मानूस के अधिकार और अस्तित्व को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।

राज ठाकरे और शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे का संयुक्त साक्षात्कार का पहला भाग गुरुवार को शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित हुआ। साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि दोनों चचेरे भाई किसी राजनीतिक मजबूरी के कारण नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मराठी अस्मिता की रक्षा के उद्देश्य से एक मंच पर आए हैं।

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नगर निकायों पर नियंत्रण को बताया अहम
साक्षात्कार में राज ठाकरे ने कहा कि राज्य के बाहर से आने वाले लोग अब केवल रोजगार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने अलग राजनीतिक और निर्वाचन क्षेत्र भी बना रहे हैं। उन्होंने इसे मुंबई को महाराष्ट्र से अलग करने की पुरानी सोच से जोड़ते हुए कहा कि यह घाव आज भी भरा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौर जैसे बनते जा रहे हैं।

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राज ठाकरे ने स्पष्ट कहा कि यदि भाजपा नगर निगमों पर नियंत्रण कर लेती है, तो मराठी मानूस के पास अपने हक की लड़ाई लड़ने के लिए बहुत कम विकल्प बचेंगे। उन्होंने मुंबई, पुणे, ठाणे, नासिक, मीरा-भायंदर, कल्याण-डोंबिवली और छत्रपति संभाजीनगर जैसे प्रमुख शहरों के नगर निकायों पर नियंत्रण को जरूरी बताया।

राज्य सरकार पर उद्धव ठाकरे का हमला
उद्धव ठाकरे ने राज्य सरकार की विकास नीति पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा विकास की बात तो करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह “बिना योजना का विकास” है, जो प्रगति के बजाय नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को खुद यह स्पष्ट नहीं है कि वह क्या चाहती है और सत्ता में बैठे लोग मुंबई और मराठी जनता से कटे हुए हैं।

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मादक पदार्थों के मुद्दे पर भी सवाल
राज ठाकरे ने राज्य में बढ़ते मादक पदार्थों के खतरे को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने दावा किया कि नशीली दवाओं के खिलाफ कार्रवाई कमजोर पड़ गई है और तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रह गया है। साथ ही उन्होंने राजनीति में धन के बढ़ते प्रभाव और नशे के प्रसार के बीच संबंध की जांच की जरूरत पर जोर दिया।

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Author: Shakshi Negi
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