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‘मुस्लिम-विरोधी’ आरोपों पर ई. के. पलानीस्वामी का पलटवार, डीएमके की नीतियों पर उठाए सवाल

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‘मुस्लिम-विरोधी’ आरोपों पर ई. के. पलानीस्वामी का पलटवार, डीएमके की नीतियों पर उठाए सवाल

महिला योजना से लेकर पेंशन तक, ई. के. पलानीस्वामी ने गिनाईं सरकार की कमियां

वेल्लोर। तमिलनाडु की सियासत में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। ई. के. पलानीस्वामी ने एम. के. स्टालिन पर तीखा हमला बोलते हुए उनकी सरकार और नीतियों पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। खासतौर पर अल्पसंख्यकों और शासन व्यवस्था को लेकर दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

अन्नाद्रमुक के महासचिव ई. के. पलानीस्वामी ने द्रमुक प्रमुख और मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी पार्टी को भाजपा से गठबंधन के आधार पर ‘मुस्लिम-विरोधी’ बताना पूरी तरह राजनीतिक रणनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि द्रमुक ने अल्पसंख्यकों के भरोसे को तोड़कर सत्ता हासिल की है।

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पलानीस्वामी ने तिरुनेलवेली की एक घटना का जिक्र करते हुए कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक पुलिस उप-निरीक्षक ने अपनी सुरक्षा को लेकर शिकायत की थी, लेकिन समय पर कार्रवाई नहीं हुई और बाद में उसकी हत्या कर दी गई। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या यही अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मॉडल है।

अपने कार्यकाल का हवाला देते हुए ई. के. पलानीस्वामी ने कहा कि अन्नाद्रमुक सरकार ने मुसलमानों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की थीं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि द्रमुक ने भी पहले भाजपा के साथ गठबंधन किया था, ऐसे में अब उनके आरोप राजनीतिक द्वंद्व का हिस्सा हैं।

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चुनावी रैली के दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन के बयानों को अहंकारपूर्ण बताते हुए कहा कि द्रमुक को अपने पिछले चुनावी प्रदर्शन पर नजर डालनी चाहिए। उन्होंने 2011 से 2021 के बीच अन्नाद्रमुक की चुनावी सफलताओं का जिक्र करते हुए अपनी पार्टी की मजबूती पर जोर दिया।

इसके साथ ही पलानीस्वामी ने द्रमुक सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि किसानों, कर्मचारियों और अन्य वर्गों से किए गए कई वादे अब तक पूरे नहीं हुए हैं। पुरानी पेंशन योजना और अन्य घोषणाओं को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा।

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महिलाओं को दी जाने वाली मासिक सहायता योजना का जिक्र करते हुए उन्होंने दावा किया कि यह फैसला भी अन्नाद्रमुक के दबाव के कारण लागू किया गया। कुल मिलाकर, तमिलनाडु की राजनीति में दोनों दलों के बीच टकराव और बयानबाजी आने वाले चुनावों से पहले और तेज होने के संकेत दे रही है।

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Author: Shakshi Negi
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