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डिप्रेशन सिर्फ उदासी नहीं, गंभीर मानसिक बीमारी का संकेत: जानिए चेतावनी लक्षण

स्वास्थ्य

डिप्रेशन सिर्फ उदासी नहीं, गंभीर मानसिक बीमारी का संकेत: जानिए चेतावनी लक्षण

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तनाव, थकान और कभी-कभार उदास महसूस करना आम बात है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब नकारात्मक भावनाएं लंबे समय तक पीछा न छोड़ें, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि डिप्रेशन केवल मूड खराब होना नहीं, बल्कि एक गंभीर चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका समय पर इलाज जरूरी है।

चिकित्सकों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति दो हफ्ते या उससे अधिक समय तक लगातार निराश, खालीपन या उदासी महसूस करता है और इसका असर उसके काम, पढ़ाई, रिश्तों और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने लगता है, तो यह अवसाद की ओर इशारा करता है। अक्सर लोग इसे कमजोरी या मानसिक भ्रम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि डिप्रेशन का संबंध मस्तिष्क के रसायनिक असंतुलन से होता है।

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मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि अवसाद का एक बड़ा संकेत है रुचि और आनंद का खत्म हो जाना। व्यक्ति उन कामों में भी खुशी महसूस नहीं कर पाता, जो कभी उसे उत्साहित करते थे। भविष्य को लेकर निराशा बढ़ जाती है और हर चीज बेकार लगने लगती है।

डिप्रेशन का असर शरीर पर भी साफ दिखाई देता है। नींद का पैटर्न बिगड़ जाता है—कुछ लोगों को नींद नहीं आती, तो कुछ जरूरत से ज्यादा सोने लगते हैं। इसी तरह भूख में अचानक बदलाव आता है, जिससे वजन तेजी से घट या बढ़ सकता है। ये बदलाव मानसिक परेशानी के साथ-साथ शारीरिक चेतावनी भी माने जाते हैं।

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अवसाद से जूझ रहे लोगों को एकाग्रता और याददाश्त से जुड़ी दिक्कतें भी होने लगती हैं। पढ़ाई, ऑफिस का काम या सामान्य बातचीत पर ध्यान बनाए रखना मुश्किल हो जाता है। छोटे-छोटे फैसले लेना भी भारी लगने लगता है, जिससे आत्मविश्वास लगातार कमजोर होता चला जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में व्यक्ति बेहद बेचैन, चिड़चिड़ा या भीतर से तनावग्रस्त नजर आता है। सबसे चिंताजनक संकेत तब सामने आता है, जब खुद को बेकार समझने की भावना गहरी हो जाए और मृत्यु या आत्म-नुकसान से जुड़े विचार आने लगें। ऐसी स्थिति को मानसिक स्वास्थ्य की आपात स्थिति माना जाता है और तुरंत विशेषज्ञ सहायता लेना बेहद जरूरी होता है।

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मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट संदेश है कि डिप्रेशन छुपाने या सहने की चीज नहीं है। सही समय पर पहचान और इलाज न केवल व्यक्ति की जिंदगी को बेहतर बना सकता है, बल्कि गंभीर परिणामों से भी बचा सकता है।

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Author: Shakshi Negi
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