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बलूचिस्तान में बीएलए का हिंसक अभियान, सुरक्षा एजेंसियों पर किये ताबड़तोड़ हमले

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बलूचिस्तान में बीएलए का हिंसक अभियान, सुरक्षा एजेंसियों पर किये ताबड़तोड़ हमले

39 जगहों पर एकसाथ हमले, कई पुलिस स्टेशन कब्जे में, इलाके में फैला डर और तनाव

बलूचिस्तान। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने बलूचिस्तान में 39 विभिन्न स्थानों पर समन्वित हमलों की जिम्मेदारी ली है। संगठन ने दावा किया है कि उसने कई पुलिस स्टेशनों पर कब्जा कर लिया है और प्रमुख राजमार्गों पर नाकेबंदी की है। बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच के अनुसार, हमलों में पुलिस स्टेशन, सैन्य काफिले, राजमार्ग और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया है। संगठन ने एक प्रेस बयान में कहा है कि यह अभियान अभी जारी है और इसके पीछे कुछ खास उद्देश्य हैं जिन्हें वह हासिल करना चाहता है।

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बलूचिस्तान में जारी अलगाववादी आंदोलन

बलूचिस्तान में लंबे समय से आजादी की मांग को लेकर अलगाववादी गतिविधियां चल रही हैं। दशकों से जारी इस संघर्ष में हजारों लोग मारे गए और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। हालिया हमले इस लंबे संघर्ष को और उग्र बना सकते हैं, खासकर जब स्वायत्तता और संसाधनों के नियंत्रण की मांगें एक बार फिर प्रमुखता में आ रही हैं।

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बीएलए का मकसद और विरोध

बीएलए पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में सक्रिय एक हथियारबंद संगठन है, जो बलूच लोगों के लिए स्वतंत्रता की मांग करता है। संगठन का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार बलूच समुदाय के साथ अन्याय और आर्थिक शोषण कर रही है। उनका कहना है कि क्षेत्र के गैस और खनिज जैसे संसाधनों का दोहन तो हो रहा है, लेकिन बलूच लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा। बीएलए चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को भी शोषणकारी मानता है और इससे जुड़ी परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा चुका है।

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मानवाधिकार हनन और बलूच जनता की पीड़ा

बलूचिस्तान, जहां अपार प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं, पाकिस्तान का सबसे पिछड़ा इलाका बना हुआ है। मानवाधिकार संगठनों जैसे ह्यूमन राइट्स वॉच और एमनेस्टी इंटरनेशनल ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने हजारों बलूच कार्यकर्ताओं, छात्रों और पत्रकारों को गायब किया या मारा है। इन घटनाओं के पीछे जवाबदेही का अभाव और लगातार मिलने वाली सामूहिक कब्रें स्थानीय जनता में डर और आक्रोश को बढ़ा रही हैं।

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Author: Shakshi Negi
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