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देहरादून के सरकारी चिकित्सालयों में चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं पर कांग्रेस मुखर , महानगर अध्यक्ष ने डी जी हैल्थ को सौपा ज्ञापन

उत्तराखंड

देहरादून के सरकारी चिकित्सालयों में चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं पर कांग्रेस मुखर , महानगर अध्यक्ष ने डी जी हैल्थ को सौपा ज्ञापन

देहरादून महानगर कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमण्डल ने महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा के नेतृत्व में स्वास्थ्य महानिदेशक तृप्ति बहुगुणा से उनके कार्यालय में मुलाकात कर देहरादून के सरकारी चिकित्सालयों में चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं पर उनका ध्यान आकर्षित करते हुए ज्ञापन प्रेषित किया।महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को सौंपे ज्ञापन में महानगर अध्यक्ष लालचन्द शर्मा ने कहा कि प्रदेश की राजधानी होने के बावजूद देहरादून महानगर क्षेत्र में सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की हालत बहुत दयनीय बनी हुई है। जिससे आम मरीजों को बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वैष्विक महामारी कोरोना की नई लहर के बीच सरकारी अस्पतालों की बदहाल स्थिति मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती है। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में शामिल राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भी मरीजों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही है। जिस तरह के हालात बन रहे हैं उससे यही लग रहा है कि दून अस्पताल को फिर से कोविड अस्पताल के रूप में तब्दील कर दिया जाएगा। दून अस्पताल में पिछले कई महीनों से एम.आर.आई. मशीन उपलब्ध नहीं है। ऐसी स्थिति में अगर कोरोना के मरीज को एम.आर.आई. जांच की जरूरत पड़ती है तो अन्य अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर भी उनकी जांच करने से कतराएंगे। इस हेतु दून अस्पताल में अतिशीघ्र एमआरआई मशीन उपलब्ध कराई जाए। दून अस्पताल में मैमोग्राफी मशीन से स्तन कैंसर की जांच भी नहीं हो पा रही है, जिससे महिलाओं को निजी अस्पतालों के भरोसे रहना पड़ रहा है। दूसरी ओर दून अस्पताल के निर्माण कार्य के पिछले लंबे समय से अधूरे पडे होने से आम मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। नया ओपीडी भवन आधे अधूरे निर्माण कार्यों के साथ आनन-फानन में दून अस्पताल के हैंड ओवर कर दिया गया है। जबकि अभी तक नई बिल्डिंग में न तो लिफ्ट ठीक से काम कर रही है और न पर्याप्त स्टेचर मिल पा रही हैं। पांचवें तल पर कार्य अधूरा पड़ा हुआ है जो मरीजों, तीमारदारों और अस्पताल के स्टाफ की जान पर भारी पड़ सकता है। इसी तरह अंडर ग्राउंड पार्किंग की भी सुविधा नहीं हो पाई है। जिससे अस्पताल परिसर के साथ ही बाहर सडक पर जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके अलावा प्रेमनगर स्थित राजकीय चिकित्सालय में भी स्थायी रेडियोलॉजिस्ट न होने से अल्ट्रासाउंड में दिक्कत आ रही है। इससे सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं को झेलनी पड़ रही है। अस्पताल में साफ-सफाई का भी नितांत अभाव बना हुआ है, जिससे संक्रामक बीमारियों के बढ़ने का खतरा बना हुआ है। अस्पताल में एक्स-रे मशीन की ए.एम.सी. करवाने के साथ ही कोविड के बढते मामलों को देखते हुए वैक्सिनेशन के लिए अतिरिक्त नर्सिंग स्टाॅफ की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वैक्सिनेशन का कार्य सुचारू हो सके। इसी प्रकार गांधी शताब्दी अस्पताल में भी ईसीजी जांच तक के लिए गर्भवती महिलाओं को दीन दयाल उपाध्याय कोरोनेशन अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है जो कि वहां से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित है जिससे गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह नियमित रेडियोलॉजिस्ट की पर्याप्त व्यवस्था न होने से गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए कई-कई दिन तक की वेटिंग दी जाती है। साथ ही कोरोनेशन अस्पताल में नई बिल्डिंग का कार्य बहुत ही धीमी गति से चल रहा है।
प्रतिनिधिमण्डल ने कहा कि देहरादून महानगर के चिकित्सालयों की उपरोक्त हालातों को देखते हुए लचर स्वास्थ्य सुविधाओं सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में यदि दून अस्पताल कोविड अस्पताल में तब्दील होता है तब सामान्य मरीजों को कठिनाई का सामना करना पड़ेगा तथा गरीब मरीजों को मजबूरन निजी अस्पतालों में इलाज को मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश की राजधानी देहरादून में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति है तो दूरस्थ और पर्वतीय जिलों में क्या हाल होंगे इस बात का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
प्रतिनिधिमण्डल ने महानिदेशक से मांग की कि राजधानी की स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति में अतिशीघ्र सुधार हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देशित किया जाय तथा व्यक्तिगत तौर पर इसकी निगरानी की जाय।
महानिदेशक ने प्रतिनिधिमण्डल को आश्वासन दिया कि महानगर की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हेतु अतिशीघ्र कदम उठाये जायेंगे।
प्रतिनिधिमण्डल में पूर्व विधायक राजकुमार, राजीव पुंज, सोमप्रकाश बाल्मीकि, मोहित ग्रोबर, बलराज भ्रामरी, भरत शर्मा आदि शामिल थे।

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